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गढ़ा का इतिहास

गढ़ा में राजा यादवराय ने राज्य की नींव रखी थी। इनके वंशज राजा मदनसिंह (34वें राजा) गढ़ा में स्थित मदन महल बनवाये। राजा मदनसिंह करीब 1116 ई० से राज्यारंभ किये। यह किला महाराजा संग्रामशाह को विरासत में मिली थी। यह किला एक चट्टान के उपर बनाया गया है। इसलिये इस किले से बाहर जाने का कोई सुरंग या गुप्त दरवाजा नहीं है। किला विशालकाय चट्टानों वाली पहाड़ी पर बनाया गया है। जंगल और चट्टानों के मध्य किला होने के कारण यहां शत्रुओं से लोहा लेना आसान होता रहा होगा। गोंड़ और स्थानीय लोग गोरिल्ला युद्ध में माहिर होते थे। इस वजह से ये विशाल चट्टानें छुपकर वार करने में बेहद सहायक रही होंगी।

मदनमहल किला के ठीक पश्चिम में एक और किले के भग्‍नावशेष मौजूद हैं। संभवत: इस किले में सेना व सैन्य सामग्री रखी जाती रही होगी। इस किले में पानी का एक कुण्ड बना हुआ है। यह कुंड शायद स्नानागर रहा हो। इमारत का निर्माण पत्थरों एवं ईंटों से किया गया है।

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