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गढ़ाकोटा का इतिहास

महाराजा संग्राम शा‍ह के 52 गढों में से एक गढ़ गढ़ाकोटा भी है जो वर्तमान में सागर जिले में स्थित है। संग्राम शाह के उत्तराधिकारी महाराजा दलप‍ति शाह ने गढ़ा साम्राज्य के विकास के लिये महत्वपूर्ण कार्य किये। इन्होंने करीब 18 वर्ष तक शासन किया। महाराजा के आकस्मिक मृत्योपरांत कुंवर वीरनारायण को राज गद्दी मिली और महारानी दुर्गावती साम्राज्य की बागडोर संभालीं। मुगल सल्तनत के आक्रमण से अपने राज्य की रक्षा करते हुए महारानी वीरगति को प्राप्त हुईं। इनकी मृत्यु के पश्चा‍त् महाराजा दलपति शाह के भाई राजा चंद्रशाह को मुगल सल्तनत ने राजा बना दिया और इस एवज में अकबर को राज्य का अधिकांश उपजाउ हिस्सा दिया गया। इस तरह गढ़ाकोटा गोंडवाना साम्राज्य से अलग हो गया।

गढ़ाकोटा का किला सुनार नदी के तट पर स्थित है जिसका निर्माण राजा मर्दानसिंह ने करवाया था। मराठा शासन काल में सन् 1804 के आसपास गढ़ाकोटा में राजपूत राजा मर्दान सिंह का शासन था। गोविंदराव त्रिंबक और माल जी अहिरराव ने गढ़ाकोटा पर आक्रमण किया और इस युद्ध में राजा मर्दानसिंह शहीद हो गये। 1857-58 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों द्वारा गढ़ाकोटा के किला को ध्वस्त किया गया। परंतु आज भी वहां की दीवारें और चांदनी (दीवारों पर मनमोहक नक्‍काशी) अपना वैभव को प्रस्‍तुत करती हैं। इस किले की सामने यानि प्रवेश द्वार का भाग का निर्माण पत्‍थरों से किया गया है जो काफी पुराने समय में निर्मित किया गया प्रतीत होता है। किला के अंदर के भागों का निर्माण ईंटों से किया गया है तथा यह निर्माण संरचना नवीन शैली की प्रतीत होती है।

गढ़ाकोटा कैसे पहुंचें

सागर जिला मुख्यालय से म.प्र.राज्‍य मार्ग 14 में करीब 55 कि.मी. की दूरी तय करने पर गढ़ाकोटा मिलता है। एक अन्‍य मार्ग सागर जिला मुख्‍यालय को रहली तहसील से गढ़ाकोटा को जोड़ती है तथा इस मार्ग की लंबाई करीब 60 कि.मी. है।

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