धमौनी गढ़ में आपका स्वागत है

धामोनी का इतिहास

महाराजा संग्राम शाह के 52 गढ़ों में से एक गढ़ धामोनी भी था। राजा नरेंद्रशाह के शासनकाल तक धामोनी गढ़ा मण्डला राज्य का हिस्सा रहा है। इसी राजवंश के हरिसिंह के पुत्र पहाड़सिंह ने विद्रोह करके राज-सिंहासन पर कब्जा करना चाहा। इन परिस्‍थतियों में नरेंद्रशाह को दिल्ली के बादशाह औरंगजेब से राजा का मान्यता पत्र प्राप्त करने के लिए पांच गढ़ दिए गये। इन पांच गढों में एक धामोनी भी था। ओरछा के राजा छत्रसाल बुंदेला मुगलों से युद्ध करते रहे और औरंगजेब से धामोनी में कब्‍जा कर लिया था।

धामौनी में एक विशाल किला है जो गांव से पूर्व दिशा में लगभग 1 किलोमीटर की दूरी तय करने पर मिलता है। इस किले का परिक्षेत्र बहुत विशाल एवं परिदृश्य अत्यंत मनमोहक है। लगभग 1 वर्ग किमी मे यह किला फैला हुआ है। परिसर के अंदर भी कुछ सुंदर इमारतें हैं जो समय के साथ खंडहरों में तब्दील हो चुकी हैं। इस किले परिसर के बाहर एक पुराना और बड़ा कब्रस्तान है। इन कब्रों के निर्माण में नक्काशीदार पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।

धामोनी कैसे पहुंचें

सागर जिला मुख्‍यालय के उत्‍तर दिशा में बांदा तहसील अंतर्गत ग्राम धामोनी स्थित है। सागर शहर से धामोनी पहुंचने के लिये सागर-बांदा सड़क मार्ग पर करीब 39 किलोमीटर तय करने पर ग्राम बेहरोल से धामोनी के लिये एक सड़क मार्ग विभक्‍त होता है। बहरोल से धामोनी करीब 14 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

धामोनी पहुंचने का दूसरा मार्ग सागर-मालथोन (राजमार्ग 44) पर करीब 48 कि.मी. तय करने पर ग्राम बरोडिया से सड़क मार्ग विभक्‍त होता है। बरोडिया से धामोनी करीब 18 कि.मी. दूर स्थित है।

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