सिंगोरगढ़ में आपका स्वागत है

सिंगौरगढ़

महाराजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत साहसी एवं योग्य युवक थे। इस वजह से संग्राम शाह अपने पुत्र के लिये एक सुंदर एवं सुयोग्य जीवन संगिनी तलाशने का निश्चय किया। उन्होने महोबा के चंदेल वंश के राजा की पुत्री दुर्गावती का चयन किया जो अत्याधिक सुंदर थीं एवं उनका चरित्र एवं योग्यता आगे चलकर दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई।

राजकुमारी दुर्गावती भी दलपत से विवाह के लिए इच्छुक थीं। दुर्गावती से विवाह के लिए एक राजपूत युवक महोबा नरेश के पास रिश्ता लेकर आये। जिससे महोबा के राजा द्वारा इस विवाह के लिए जातिगत आपत्ति उठाते हुए संग्राम शाह का रिश्ता खारिज कर दिया गया। इन परिस्थितियों में दलपत के पास एक ही रास्ता बच गया। दुर्गावती ने भी दलपत को व्यक्तिगत रूप से सूचित किया कि वे अब दुर्गावती को सिर्फ पराक्रम से ही प्राप्त कर सकते हैं। दलपत ने दुर्गावती की ये शर्त सहर्ष स्‍वीकार किया और अपनी गोंडी फौज के साथ महोबा राज्य पर धावा बोल दिया। आक्रमण करने की वजह सिर्फ महोबा नरेश को बंदी बनाना तथा नफरत करने वाले प्रतिदवंदियों को सबक सिखाना था। इस युद़ध में दलपत की जीत हुई और सिंगौरगढ़ किले में उनका दुर्गावती से विवाह संपन्न हुआ।

सिंगौरगढ़ किला दमोह जिला में स्थित है। यह महाराजा संग्राम शाह के 52 गढ़ों में सबसे सुरक्षित किला था। चौरागढ़ के अलावा सिंगौरगढ़ भी महाराजा संग्रामशाह की राजधानी हुआ करती थी। इस विशाल दुर्ग को एक दुर्गम पहाडी पर बनाया गया है। रूहिल्ला खान इस दुर्ग पर आक्रमण किया परंतु विजयी नहीं हो पाया। कठिन भौगोलिक संरचना के कारण यहां शत्रुओं का आक्रमण करना कठिन था। महाराजा दलपत शाह को सिंगौरगढ़ के दुर्ग में रहना बहुत पसंद था। बादशाह अकबर के साम्राज्‍य अंतर्गत मानिकपुर के सूबेदार आसफ खां ने गोंडवाना साम्राज्‍य पर आक्रमण किया तो पहला युद़ध सिंगौरगढ़ के पास ही हुआ था।

Next