Singorgarh

Our History

The Singorgarh fort is located in Damoh district of Madhya Pradesh. It was the safest fort among 52 Garha of Emperor Sangram Shah. The Queen Durgavati was married to the King Dalpatshah in this palace. In addition to Chouragarh, Singorgarh was also the capital of Emperor Sangram Shah. This fort is built on a hill which is not easily reachable. Ruhillakhan invaded to this fort but couldn’t conquer it. Due to its geographical structure, it was too difficult to attack here. The empire of the Emperor Sangram Shah was so large and it was spread to 52 Garhas. The prince Dalpatshah could live on any palace. But, Singorgarh was his favorite palace to stay.

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सिंगोरगढ़

हमारा इतिहास

सिंगौरगढ़ किला दमोह जिला में स्थित है। यह महाराजा संग्राम शाह के 52 गढ़ों में सबसे सुरक्षित किला था। इस किले में दलपतिशाह और दुर्गावती का वि‍वाह संपन्न हुआ था। चौरागढ़ के अलावा सिंगौरगढ़ भी महाराजा संग्रामशाह की राजधानी हुआ करती थी। इस विशाल दुर्ग को एक दुर्गम पहाडी पर बनाया गया है। रूहिल्ला खान इस दुर्ग पर आक्रमण किया परंतु विजयी नहीं हो पाया। कठिन भौगोलिक संरचना के कारण यहां शत्रुओं का आक्रमण करना कठिन था। महाराजा संग्राम शाह का साम्राज्य विशाल था और इसका विस्तार 52 गढ़ों तक था। युवराज दलपति शाह किसी भी गढ़ पर रह सकते थे। परंतु उन्हें सिंगौरगढ़ के दुर्ग में रहना बहुत पसंद था।

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गढ़पहरा गढ़

गढ़पहरा का इतिहास

यह महाराजा संग्रामशाह के 52 गढों में से एक गढ़ था। संग्राम शाह की मृत्यु के बाद यहां का राज्य दांगी राजपूतों के हाथों में चला गया। किंतु गढ़ा राजवंश के 57 वें शासक राजा नरेंद्रशाह के शासनकाल में गढ़पहरा गढ़ा राज्‍य का पुन: हिस्‍सा बन चुका था। अपने ही राजवंश के पहाड़सिंह के दोनों पुत्र अब्‍दुल रहमान और अब्‍दुल हाजी ने सत्‍ता हथियाने के लिए शाही सेना की मदद से गढ़ा राज्‍य पर आक्रमण कर दिये। युवा राजा नरेंद्रशाह ने शत्रुओं को परास्‍त करने के लिये ओरछा के राजा छत्रसाल और बख्‍त बुलंदशाह से सहायता मांगी। बख्‍त बुलंदशाह ने छत्रसाल की सैन्‍य सहायता मिलने से पहले ही अब्‍दुल रहमान, अब्‍दुल हाजी और अजीम खां को गंगई के युद्ध में मौत के घाट उतार दिया। इस सहायता के बदले में छत्रसाल को गढ़पहरा सहित हटा, रहली, खिमलासा और दमोह के किले दिये तथा बख्‍त बुलंदशाह को चौरई, डोंगरताल और घुंसार/घंसौर के किले दिये थे।

गढ़पहरा का किला सागर जिला में राष्ट्रीय राजमार्ग 26 से लगा हुआ एक पहाडी पर स्थित है। किले के प्रवेश द्वार से लगा हुआ एक सिद्ध हनुमान जी का मंदिर है। किला परिसर में कुछ दूरी तय करने पर एक बेहद आकर्षक शीशमहल मिलता है। इस शीशमहल का आकार मंदिरनुमा है। गढ़पहरा के मुख्य किला दो भागों में बंटा हुआ है। दोनों भागों में बहुत से कमरे बने हुए हैं जिनमें पत्थरों की शानदार मियालों का प्रयोग किया गया है। महल में लगे पत्थरों पर कारीगरों द्वारा नक्काशी की गई है। वर्तमान में किले के भग्‍नावशेष ही विद्यमान हैं। किला परिसर एवं किले के उपर से आसपास का दृश्‍य अत्‍यंत मनोरम होता है।

कहते हैं कि एक दुर्घटना में इस किले से स्टंट दिखाते समय एक नटिन की जान चली गई थी। जिस जगह पर गिरकर नटिन की जान चली गई थी, उसी जगह पर नटिन की समाधि बना दी गई थी। यह समाधि राजमार्ग के नजदीक बनी हुई है। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि इस किले में नट और नटिन की आत्‍मा भटकती रहती है।

गढ़पहरा कैसे पहुंचें

सागर जिला मुख्‍यालय से सागर-झांसी मार्ग पर करीब 10 किलोमीटर तय करने पर गढ़पहरा मिलता है। किला एक पहाड़ी पर स्थित है। गढ़पहरा को पुराना सागर भी कहा जाता है। इसी मार्ग पर से होकर धामोनी जाते हैं।

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धमौनी गढ़

धामोनी का इतिहास

महाराजा संग्राम शाह के 52 गढ़ों में से एक गढ़ धामोनी भी था। राजा नरेंद्रशाह के शासनकाल तक धामोनी गढ़ा मण्डला राज्य का हिस्सा रहा है। इसी राजवंश के हरिसिंह के पुत्र पहाड़सिंह ने विद्रोह करके राज-सिंहासन पर कब्जा करना चाहा। इन परिस्‍थतियों में नरेंद्रशाह को दिल्ली के बादशाह औरंगजेब से राजा का मान्यता पत्र प्राप्त करने के लिए पांच गढ़ दिए गये। इन पांच गढों में एक धामोनी भी था। ओरछा के राजा छत्रसाल बुंदेला मुगलों से युद्ध करते रहे और औरंगजेब से धामोनी में कब्‍जा कर लिया था।

धामौनी में एक विशाल किला है जो गांव से पूर्व दिशा में लगभग 1 किलोमीटर की दूरी तय करने पर मिलता है। इस किले का परिक्षेत्र बहुत विशाल एवं परिदृश्य अत्यंत मनमोहक है। लगभग 1 वर्ग किमी मे यह किला फैला हुआ है। परिसर के अंदर भी कुछ सुंदर इमारतें हैं जो समय के साथ खंडहरों में तब्दील हो चुकी हैं। इस किले परिसर के बाहर एक पुराना और बड़ा कब्रस्तान है। इन कब्रों के निर्माण में नक्काशीदार पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।

धामोनी कैसे पहुंचें

सागर जिला मुख्‍यालय के उत्‍तर दिशा में बांदा तहसील अंतर्गत ग्राम धामोनी स्थित है। सागर शहर से धामोनी पहुंचने के लिये सागर-बांदा सड़क मार्ग पर करीब 39 किलोमीटर तय करने पर ग्राम बेहरोल से धामोनी के लिये एक सड़क मार्ग विभक्‍त होता है। बहरोल से धामोनी करीब 14 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

धामोनी पहुंचने का दूसरा मार्ग सागर-मालथोन (राजमार्ग 44) पर करीब 48 कि.मी. तय करने पर ग्राम बरोडिया से सड़क मार्ग विभक्‍त होता है। बरोडिया से धामोनी करीब 18 कि.मी. दूर स्थित है।

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Garhakota

Our History

The Gadpahra Fort is nearly 10 Kilometers from Saugar District Headquarter on Saugar-Jhansi road. This fort is built on a hilltop and Gadpahra is called “Old Saugar”. This road also leads to Dhamoni.

The Garhakota Fort of Saugar district is one of 52 Garhas of Emperor Sangram Shah. Emperor Dalpat Shah, successor of Sangram Shah did many development works for Garha Kingdom. He ruled for about 18 years. Prince Virnarayan was crowned after sudden death of the Emperor and Empress Durgavati started ruling the kingdom. The Empress sacrificed her life by protecting her Kingdom from the attacks of the Mughal sultanate. King Chandra Shah, the younger brother of late Emperor Dalpati Shah was declared the King of Garha Kingdom by the Mughal Sultanate. The major part of the fertile land was given to Emperor Akbar to get the crown. This is how Garhakota and other districts separated from Gondwana Kingdom.

The fort of Garhakota is situated near Sunar River which was built by the King Mardansingh. The Rajput King Mardansingh ruled Garhkota during the Maratha reign around 1804 CE. Govind Rao Trimbak and Maalji Ahirrao invaded Garhakota. King Mardansingh died in this battle. The Garhakota fort was demolished during the rebel of 1857-58. But the beautiful architecture of Chandni and walls are telling the story of its glorious past. The entry gate of this fort is built using the stones which seems to be too old construction. Bricks are used for building the inner parts of the fort and it looks like recent architecture.

How to reach Garhakota Fort.

The Garhakota fort is located about 55 Kilometer far from the Saugar district headquarter and on the M.P. State Highway-14. Another route connects Saugar District to Garhakota via Rahli Tahsil and this route is about 60 Kilometers long.

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गढ़ाकोटा गढ़

गढ़ाकोटा का इतिहास

महाराजा संग्राम शा‍ह के 52 गढों में से एक गढ़ गढ़ाकोटा भी है जो वर्तमान में सागर जिले में स्थित है। संग्राम शाह के उत्तराधिकारी महाराजा दलप‍ति शाह ने गढ़ा साम्राज्य के विकास के लिये महत्वपूर्ण कार्य किये। इन्होंने करीब 18 वर्ष तक शासन किया। महाराजा के आकस्मिक मृत्योपरांत कुंवर वीरनारायण को राज गद्दी मिली और महारानी दुर्गावती साम्राज्य की बागडोर संभालीं। मुगल सल्तनत के आक्रमण से अपने राज्य की रक्षा करते हुए महारानी वीरगति को प्राप्त हुईं। इनकी मृत्यु के पश्चा‍त् महाराजा दलपति शाह के भाई राजा चंद्रशाह को मुगल सल्तनत ने राजा बना दिया और इस एवज में अकबर को राज्य का अधिकांश उपजाउ हिस्सा दिया गया। इस तरह गढ़ाकोटा गोंडवाना साम्राज्य से अलग हो गया।

गढ़ाकोटा का किला सुनार नदी के तट पर स्थित है जिसका निर्माण राजा मर्दानसिंह ने करवाया था। मराठा शासन काल में सन् 1804 के आसपास गढ़ाकोटा में राजपूत राजा मर्दान सिंह का शासन था। गोविंदराव त्रिंबक और माल जी अहिरराव ने गढ़ाकोटा पर आक्रमण किया और इस युद्ध में राजा मर्दानसिंह शहीद हो गये। 1857-58 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों द्वारा गढ़ाकोटा के किला को ध्वस्त किया गया। परंतु आज भी वहां की दीवारें और चांदनी (दीवारों पर मनमोहक नक्‍काशी) अपना वैभव को प्रस्‍तुत करती हैं। इस किले की सामने यानि प्रवेश द्वार का भाग का निर्माण पत्‍थरों से किया गया है जो काफी पुराने समय में निर्मित किया गया प्रतीत होता है। किला के अंदर के भागों का निर्माण ईंटों से किया गया है तथा यह निर्माण संरचना नवीन शैली की प्रतीत होती है।

गढ़ाकोटा कैसे पहुंचें

सागर जिला मुख्यालय से म.प्र.राज्‍य मार्ग 14 में करीब 55 कि.मी. की दूरी तय करने पर गढ़ाकोटा मिलता है। एक अन्‍य मार्ग सागर जिला मुख्‍यालय को रहली तहसील से गढ़ाकोटा को जोड़ती है तथा इस मार्ग की लंबाई करीब 60 कि.मी. है।

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Gadpahra

History of Gadpahra Fort

It was one of the 52 Garhas of the Emperor Sangram Shah. Dangi Rajpoots seized this district after death of the Emperor. But this Gadpahra district was again conjoined to Garha Kingdom prior the reign of the 57th ruler King Narendra Shah. Abdul Rahman and Abdul Hazi, son of Pahadsingh of same dynasty invaded Garha Mandla with the help of Royal Army and tried seizing the throne. The young King Narendra Shah asked for help from King Chhatrsal Bundela of Orchha and Bakht Buland Shah to defeat the enemies. Bakht Buland Shah killed Abdul Rahman, Abdul Hazi and Azim Khan in the battle of Gangai before the armed force of the King Chhatrasal Orchha reached. Gadpahra, Hata, Rahli, Khimlasa and Damoh Forts were given to Chhatrasal and Bakht Buland Shah received Chourai, Dongartal and Ghunsar/Ghansor Forts in return of the help.

Gadpahra Fort is situated on a hilltop nearby the National Highway-26 in Saugar District. A very famous Hanuman Temple is built in the entry gate of the fort. After walking little distance inside the fort campus, a fabulous Sheeshmahal is located. This Sheeshmahal palace is designed like a temple. The main fort of Gadpahra divided in 2 parts. Both the parts contain many rooms which are built with stone cross girders on roof top. The stones used in this palace are engraved. The ruins are available of the splendid palace at present. The fort campus and the view of the surroundings are eye-catching from the rooftop of the palace.

It is said that a female Acrobat died during an accident while performing a stunt from this fort. A monument was built to the place where the Acrobat died after falling from the rope. This monument is still available near the National Highway. People say, the spirit of male and female Acrobat still haunts in this palace.

How to Reach Gadpahra Fort

The Gadpahra Fort is nearly 10 Kilometers from Saugar District Headquarter on Saugar-Jhansi road. This fort is built on a hilltop and Gadpahra is called “Old Saugar”. This road also leads to Dhamoni.

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Dhamoni Garha

History of Dhamoni Fort

Dhamoni Fort was one of the 52th Garhas of the Emperor Sangram Shah. It remained the part of the Garha Mandla Kingdom during the reign of the King Narendra Shah. Pahadsingh, son of Harisingh of this dynasty revolted and tried seizing the throne. In this situation, Narendra Shah had to offer 5 Garhas to Emperor Aurangzeb of Delhi in order to get the Accreditation Letter. Dhamoni Fort was one of those 5 Garhas. King Chhatrasal Bundela of Orchha fought the Mughals and seized Dhamoni.

There is a huge fort situated in the east of the Dhamoni Village which is almost 1 Kilometer far. The fort campus is so large and the site is eye-catching. The fort campus is spread in nearly 1 Square Kilometer. There are some beautiful buildings built inside the fort campus which are turning to ruins. An old and large Muslim Cemetery is also situated in front of the North gate of this fort. Engraved stones were used to build these graveyards.

How to Reach Dhamoni Fort

Dhamoni Village is located in Banda Tahsil of Sagar/Saugar District. This village is situated in the East direction from the District Headquarter. After traveling approximately 39 Kilometers on the Saugar to Banda road, a road divides from Behrol Village which leads to Dhamoni Village. Dhamoni Village is about 14 Kilometer far from Behrol Village.

Another way to reach Dhamoni Village is Saugar- Malthon Road (state highway 44). A road diverts from Barodiya Village which is located near the State Highway 44 and about 48 Kilometers from Saugar City. Dhamoni village is 18 Kilometer far from Barodiya Village.

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