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मण्‍डला गढ़ का इतिहास

रामनगर के राजा केसरी शाह की षड़यंत्र पूर्वक हत्या अपने ही वंश के हरिसिंह के द्वारा करवा दी गई। परंतु हरिसिंह राजा नहीं बन सका। दिवंगत राजा केसरी शाह के मंत्री के आदेश के अनुसार हरिसिंह से युद्ध हुआ और इस युद्ध में हरिसिंह की मृत्यु हो गई। हरिसिंह का पुत्र पहाड़सिंह सत्‍ता हासिल करने के लिए प्रयास जारी रखा। राजा केसरी शाह की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र नरेंद्र शाह, जिनकी आयु उस समय मात्र 7 वर्ष की थी, मंत्री रामकिशन बाजपेयी ने गंगाधर बाजपेयी को शाही दरबार भेजकर मुगल बादशाह औरंगजेब से बालक नरेंद्रशाह को राजा बनाने के लिए मान्यता पत्र हासिल कर लिये और औपचारिकताओं के बाद उन्हें सन् 1691 में गढ़ा राज्य का राजा घोषित कर दिया गया। इस समझौते में बादशाह औरंगजेब को वर्तमान सागर जिले में स्थित धामोनी, हटा, शाहगढ़, गढ़ाकोटा और देवास जिले में स्थित मडि़यादो नामक 5 गढ़ों को दिया गया।

राजा नरेंद्रशाह के राज्‍यकाल में बहुत से आक्रमण और विद्रोह हुए। रामनगर का किला में सुरक्षा दीवार या दुर्ग के न होने की वजह से सुरक्षित नहीं था। सिर्फ एक ओर नर्मदा नदी का किनारा ही सुरक्षा कवच के रूप में था। यह किला अन्‍य किलों की तरह उंची पहाड़ी पर न होकर समतल जमीन में बनाई गई है। इन सभी कारणों से राजा नरेंद्रशाह ने राजधानी रामनगर से हटाकर मण्डला में स्थापित करना पड़ा। मण्डला के किले का निर्माण नर्मदा और बंजर नदी के संगम के पास में किया गया जहां पर लगभग तीनों ओर से नर्मदा के जल प्रवाह के कारण प्राकृतिक सुरक्षा मिल रही थी तथा दक्षिण की तरफ खाई खुदवा दिया गया। खाई खुदवाने से नर्मदा नदी की जल-धारा विभाजित होकर इस खाई में से होकर प्रवाहित होने लगी। सन् 1698 के आस-पास मण्डला का यह किला राजा नरेंद्रशाह के द्वारा बनवाया गया था।

पहाड़सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके दो पुत्रों ने मुगल सल्तनत में जाकर इस्लाम धर्म अपना लिया। इन दोनों के नाम अब्दुल रहमान तथा अब्दुल हाजी हो गये। अब्दुल रहमान और अब्दुल हाजी को गढ़ा मण्डला राज्य को जीतने के लिए मुगल सेना की सहायता मिल गई। इन्होंने मण्डला राज्य पर आक्रमण कर दिया। इस आक्रमण को विफल करने के लिए राजा नरेंद्र शाह को बख्त बुलंद शाह तथा राजा छत्रसाल बुंदेला की सहायता लेनी पड़ी। बख्त बुलंदशाह ने राजा छत्रसाल की सैन्य सहायता आने के पूर्व ही युद्ध में अब्दुल रहमान तथा अब्दुल हाजी को परास्त कर दिया। इस युद्ध में अब्दुल रहमान तथा अब्दुल हाजी मारे गए। इस सहायता के बदले में बख्त बुलंदशाह को 3 तथा राजा छत्रसाल बुंदेला को 5 गढ़ दिये गये।

मण्डला का अंतिम गोंड शासक राजा नरहरिशाह थे। गोंड साम्राज्य के अंत होने के बाद सन् 1781 में संपूर्ण गढ़ा मण्डला का राज्य सागर के मराठा शासकों के अधीन हो गया। मण्डला के इसी राजमहल में शंकरशाह और रघुनाथ शाह का जन्म हुआ था। मराठा शासकों के बाद मण्डला किले में अंग्रेजों ने 24 मार्च 1818 कब्जा कर लिया और 1947 में भारत देश की आजादी प्राप्‍त हाेने तक अंग्रेजी शासन के अधीन रहा।

मण्‍डला गढ़ कैसे पहुंचें

मण्‍डला जिला मुख्‍यालय से दक्षिण में करीब 1 किलोमीटर दूर नर्मदा-बंजर नदी के संगम पर स्थित है। किले के भग्‍नावशेष ही वर्तमान में विद्यमान हैं। किला परिसर में राजा नरेंद्रशाह द्वारा बनवाये गए 18 भुजाओं वाली दुर्गा देवी की राजराजेश्‍वरी मंदिर आज भी मौजूद है।