Welcome To लांजीगढ़

लांजीगढ़ का इतिहास

लांजीगढ़ राज्य से राजा यादवराय के गढ़ा राज्य और मरावी राजवंश की उत्पत्ति माना जा सकता है। लांजीगढ़ में कलचुरि राजाओं का शासन था। कलचुरि शासकों के बाद लांजीगढ़ गोंड शासक के अधीन हुआ और कलचुरी शासक रतनपुर में राजधानी स्थापित किये। लांजीगढ़ के गोंड शासक के राज्य की सीमाओं का विस्तार वर्तमान जबलपुर क्षेत्र तक था। यादवराय एक पराक्रमी युवक था। इस वजह से लांजीगढ़ राज्य में यादवराय को अपनी सेवाऐं देने का अवसर प्राप्त हुआ। यादवराय को गढ़ा क्षेत्र में तैनात किया गया। यहां पर यादवराय को राज-कौशल सीखने का पर्याप्त अवसर मिला। समय बीतता गया और यादवराय राजकार्य में निपुण होते गये। इन गुणों से प्रभावित होकर राजा ने अपनी कन्या का विवाह यादवराय से कर दिया और गढ़ा क्षेत्र को भेंट स्वरूप प्रदान किया। यादवराय ने सर्वे पाठक को मंत्री नियुक्त कर उनकी सहायता से गढ़ा में अपनी राजधानी स्थापित किए। इस तरह राजा यादवराय ने गढ़ा राज्य की नींव रखी तथा उनके राजवंश की शुरूआत हुई।

राजा यादवराय के द्वारा गढ़ा राज्य की नींव रखने के संबंध में किवदंतियां हैं। उनमें से एक मंडला के नागवंशी राजा धानू शाह/धानू पंडा की पुत्री से विवाह कर राज्य प्राप्त करने के संबंध में तथा दूसरा अमरकंटक तीर्थ यात्रा के दौरान स्‍वप्‍न में मां नर्मदा द्वारा गढ़ा राज्य की स्‍थापना सर्वे पाठक की सहायता से रखने के संबंध में हैं।

लांजी में एक विशाल किला के भग्नावशेष मौजूद हैं। यह किला मुख्य शहर से लगा हुआ है तथा इसका विस्ता़र करीब 16 एकड़ जमीन तक बताया जाता है। किले के चारों ओर खाई अथवा तालाब खुदवाकर सुरक्षित किया गया था। यहां पर कलचुरी, यादव, राजपूत और गोंड़ शासकों ने शासन किया है। किला परिसर में महामाया का भव्य मंदिर स्थित है। किले के निर्माण में पत्थरों तथा ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। कुछ दीवारों पर देवी-देवताओं के पत्थर पर उकेरी गई प्रतिमाऐं लगी हुईं हैं। किला परिसर में एक बहुत पुराना कनक-चंपा का पेड़ भी लगा हुआ है।

लांजीगढ़ कैसे पहुंचें

लांजी बालाघाट जिले की एक तहसील है। बालाघाट जिला मुख्यालय से लांजी करीब 61 किलोमीटर दूर मध्‍यप्रदेश-छत्तीसगढ़ राज्‍य की सीमा के करीब स्थित है। लांजी तहसील छत्तीसगढ़ राज्य से लांजी-खैरागढ़ सड़क मार्ग तथा महाराष्ट्र राज्‍य से लांजी-सोगलपुर-अमगांव सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।