Welcome To बाजना मठ

गढ़ा के मदनमहल के सबसे उपरी हिस्से से दक्षिण दिशा में संग्राम सागर झील दिखाई देता है। संग्राम सागर का निर्माण महाराजा संग्राम शाह ने कराया था। यह विशाल झील तीनों ओर पथरीली पहाडि़यों से घिरा हुआ है जो देखने पर नदी पर निर्माण किये गए किसी बांध की तरह दिखता है। यहां वर्षपर्यंत पानी उपलब्ध रहता है। संग्राम सागर कमल के फूलों से भरा हुआ रहता है तथा तरह तरह के पक्षी देखने को मिल जाते हैं।

संग्राम सागर के किनारे तांत्रिक साधना का केंद्र बाजनामठ स्थित है। यह काल भैरव का मंदिर है। यहां तांत्रिक साधना के लिये दूर दूर से साधक आते थे। महाराजा संग्राम शाह भी इस मंदिर में तंत्र साधना करते थे। एक बार एक अघोरी तांत्रिक बाजनामठ में तंत्र साधना के लिये आया। गढ़ा राज्य के वैभव देखकर तांत्रिक के मन में राज्य लिप्सा जागने लगी। अघोरी तांत्रिक राजा को मारकर स्वंय राजा बनना चाहता था। इस बात की जानकारी राजा संग्राम शाह को हो गई। जब राजा तंत्र साधना के लिये बाजनामठ गया तो साथ में एक हथियार भी छुपाकर ले गया। अघोरी तांत्रिक और राजा संग्राम शाह ने तांत्रिक साधना एक साथ आरंभ किये। साधना के अंत में अघोरी तांत्रिक राजा की बलि देना चाहा परंतु राजा ने तांत्रिक को मारकर उसकी बलि दे दी। इस तरह काल भैरव को अघोरी तांत्रिक की बलि चढ़ाने के बाद राजा में उस अघोरी की शक्तियां भी आ गईं।

संग्राम सागर के मध्य में एक टापू है जिसमें आम-खास इमारत के भग्नावशेष विद्यमान हैं। यहां पर महाराजा संग्राम शाह दरबार लगाकर जन समस्याओं का निराकरण करते थे तथा अन्य गंभीर विषयों पर बैठक आयोजित करते थे। इसी तंत्र से प्रेरित होकर मुगल शासक ने दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास का निर्माण कराया था।